मिथ्स और फैक्ट्स TB से रिलेटेड

News Desk

टीबी एक संक्रामक बीमारी है। इसे क्षय रोग, तपेदिक के नाम से भी जाना जाता है। भारत में इसके मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि सही समय पर इलाज न किया जाए, तो टीबी रोग बहुत घातक साबित हो सकता है। दरअसल, टीबी रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस के कारण होता है।

यह न केवल फेफड़ों बल्कि मास्तिष्क, गुर्दे, आंतों और हड्डियों को प्रभावित करता है। इसकी वजह लंबा उपवास, नींद पूरे न होने, तनाव में रहने और अनियमित खान पान है। लेकिन इस बीमारी के साथ कुछ गलत धारणाएं जुड़ी हैं। इसलिए जरूरी है कि अफवाहों पर विश्वास न करें, पर्याप्त जागरूकता फैलाएं और तथ्यों को सामना लाकर संदेह को दूर करने का प्रयास करें।

​भ्रम- 1: टीबी केवल फेफड़ों में फैलता है

तथ्य- हालांकि इस बीमारी की शुरूआत फेफड़ों से ही होती है, लेकिन ये शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, मास्तिष्क और रीढ़ पर भी असर डालती है। इनके संकेत और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। फेफड़ों के बाहर होने वाली टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस कहा जाता है।

स्थिति पर जरा भी संदेह हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। यदि लापरवाही बरती या अनुपचारित छोड़ दिया, तो टीबी फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है। इतना ही नहीं ब्लड स्ट्रीम की मदद से धीरे-धीरे यह फेफड़ों के बाद शरीर के अन्य अंगों में भी यह फैल जाएगी।

​भ्रम 2- टीबी एक अनुवांशिक बीमारी है

तथ्य- कई लोग ऐसा मानते हैं, कि टीबी जेनेटिक डिसीज है। लेकिन ऐसा नहीं है। टीबी अनुवांशिक बीमारी नहीं है और न ही इसके फैलने में आपके जीन का कोई लेना-देना है। टीबी का संक्रमण जीवन में कभी भी किसी को अपनी चपेट में ले सकता है। यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया के कारण होता है। इसके लिए जितनी जल्दी हो सके, उपचार लें। थोड़ी सी भी देर, जान पर भारी पड़ सकती है।

​भ्रम- 3: धुम्रपान न करने पर टीबी नहीं होगी

ज्यादातर लोग अब तक इस भ्रम में जी रहे हैं कि वह धुम्रपान नहीं करते, तो उन्हें टीबी नहीं होगी। आपको बता दें कि धूम्रपान केवल टीबी से जुड़ा जोखिम कारक नहीं है। अन्य कारक जैसे एचआईवी , डायबिटीज और किडनी से जुड़ी बीमारी भी इसके होने के लिए उतनी ही जिम्मेदार है। धूम्रपान केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि मास्तिष्क, हड्डियों, रीढ़ और आंखों को भी प्रभावित करता है।

​भ्रम-4: टीबी का इलाज नहीं हो सकता

तथ्य- लोगों के मन में आज भी टीबी को लेकर गलत धारणा है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। जबकि सच तो ये है कि टीबी से निपटने के लिए शुरूआत निदान जरूरी है। अगर व्यक्ति सही विकल्प चुनता है, दवा लेता है और नियमित रूप से फॉलो अप लेता है, तो वह टीबी से लड़ सकता है। ऐसा करने से वह लंबे समय तक टीबी मुक्त जीवन भी जी सकेगा।

​भ्रम-5: बीसीजी (BCG) लेने से टीबी नहीं होगा

तथ्य- बीसीजी का टीका बच्चों को टीबी से बीमारी होने से बचाएगा। हालांकि यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि यह टीका व्यस्कों को टीबी से बचाने में उतना सक्षम है या नहीं।

​भ्रम-6: स्वच्छता बरतने पर टीबी नहीं हो सकती –

तथ्य- अक्सर लोग सवाल करते हैं कि वे तो स्वच्छता बरतते हैं, तो उन्हें टीबी कैसे हो सकती है। तो आपको बता दें कि टीबी का संबंध केवल स्वच्छता से ही नहीं, बल्कि प्रतिरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से भी है। यह किसी को भी प्रभावित कर सकती है, बेशक आप हाइजीन को लेकर कितनी भी सावधानी क्यों ना बरत रहे हों।

अगर आपके मन में भी टीबी जैसी बीमारी को लेकर गलत धारणा बनी हुई है, तो तथ्यों को जानने की कोशिश करें। कही-सुनी बातों पर यकीन करना बीमारी को बढ़ावा दे सकता है।

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