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चार राज्यों में नोटबंदी जैसा कैश संकट, शादी का कार्ड दिखाकर लोग निकाल रहे पैसा

नई दिल्ली ।देश के कई राज्यों में नोटबंदी जैसा कैश संकट एक बार फिर गहरा गया है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, गुजरात समेत कई राज्यों में बैंकों और एटीएम में कैश नहीं है.

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बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, इन राज्यों से रिज़र्व बैंक और सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इससे निपटने के लिए वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की है. सबसे ज्यादा असर को-ऑपरेटिव बैंक और ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि कैश की किल्लत होने के पीछे कई कारण हैं. बढ़ते एनपीए ने बैंकों की साख को हिला दिया है. इसी के चलते खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है. पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और 60 फीसदी एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है.

इसके अलावा दो हजार के नोटों की छपाई बंद होने और 200 के नोटों के लिए एटीएम का कैलीब्रेट न होना भी बड़ी समस्या बन गया है. कैश संकट का सबसे ज्यादा असर उत्तराखंड और बिहार में देखने मिला है. यहां एटीएम में कैश नहीं है. उत्तराखंड के श्रीनगर, रूद्रप्रयाग जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में तो कैश को लेकर हवाला भी हो रहा है. कई दुकानदार तो 1000 रुपये कैश देने के बदले 100 रुपये चार्ज कर रहे हैं. वहीं, चम्पावत ज़िले में तो बैंक शादी का कार्ड देखकर खाता धारकों को भुगतान कर रहे हैं. बता दें कि कुछ ही दिनों में चारधाम यात्रा शुरु होने वाली है. ऐसे में बैंकों ने अतिरिक्त नकदी की मांग यात्रा सीजन को देखते हुए की है. उत्तर बिहार में रुपये की निकासी के लिए बैंक की शाखाओं से लेकर एटीएम तक लोगों की लंबी कतार लग रही है. करेंसी चेस्टों में भी पिछले डेढ़ माह से कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है.उधर, गुजरात में लोगों को एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा ही नहीं है.

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नई दिल्ली ।देश के कई राज्यों में नोटबंदी जैसा कैश संकट एक बार फिर गहरा गया है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, गुजरात समेत कई राज्यों में बैंकों और एटीएम में कैश नहीं है. बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, इन राज्यों से रिज़र्व बैंक और सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इससे निपटने के लिए वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की है. सबसे ज्यादा असर को-ऑपरेटिव बैंक और ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि कैश की किल्लत होने के पीछे कई कारण हैं. बढ़ते एनपीए ने बैंकों की साख को हिला दिया है. इसी के चलते खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है. पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और 60 फीसदी एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है. इसके अलावा दो हजार के नोटों की छपाई बंद होने और 200 के नोटों के लिए एटीएम का कैलीब्रेट न होना भी बड़ी समस्या बन गया है. कैश संकट का सबसे ज्यादा असर उत्तराखंड और बिहार में देखने मिला है. यहां एटीएम में कैश नहीं है. उत्तराखंड के श्रीनगर, रूद्रप्रयाग जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में तो कैश को लेकर हवाला भी हो रहा है. कई दुकानदार तो 1000 रुपये कैश देने के बदले 100 रुपये चार्ज कर रहे हैं. वहीं, चम्पावत ज़िले में तो बैंक शादी का कार्ड देखकर खाता धारकों को भुगतान कर रहे हैं. बता दें कि कुछ ही दिनों में चारधाम यात्रा शुरु होने वाली है. ऐसे में बैंकों ने अतिरिक्त नकदी की मांग यात्रा सीजन को देखते हुए की है. उत्तर बिहार में रुपये की निकासी के लिए बैंक की शाखाओं से लेकर एटीएम तक लोगों की लंबी कतार लग रही है. करेंसी चेस्टों में भी पिछले डेढ़ माह से कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है.उधर, गुजरात में लोगों को एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा ही नहीं है.